महाभारत 1.14.3
अस्मच्छुश्रूषणे नित्यं पिता हि निरतस्तवआचष्टैतद्यथाख्यानं पिता ते त्वं तथा वद
asmacchuśrūṣaṇe nityaṃ pitā hi niratastavaācaṣṭaitadyathākhyānaṃ pitā te tvaṃ tathā vada
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें