महाभारत 1.14.4
सूत उवाच · sūta uvāca
आयुष्यमिदमाख्यानमास्तीकं कथयामि तेयथा श्रुतं कथयतः सकाशाद्वै पितुर्मया
āyuṣyamidamākhyānamāstīkaṃ kathayāmi teyathā śrutaṃ kathayataḥ sakāśādvai piturmayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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