Loading
महाभारत 1.142.22
पुरा संरज्यते प्राची पुरा संध्या प्रवर्ततेरौद्रे मुहूर्ते रक्षांसि प्रबलानि भवन्ति च
purā saṃrajyate prācī purā saṃdhyā pravartateraudre muhūrte rakṣāṃsi prabalāni bhavanti ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें