महाभारत 1.142.31
हिडिम्बं निहतं दृष्ट्वा संहृष्टास्ते तरस्विनःअपूजयन्नरव्याघ्रं भीमसेनमरिंदमम्
hiḍimbaṃ nihataṃ dṛṣṭvā saṃhṛṣṭāste tarasvinaḥapūjayannaravyāghraṃ bhīmasenamariṃdamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें