महाभारत 1.142.33
नदूरे नगरं मन्ये वनादस्मादहं प्रभोशीघ्रं गच्छाम भद्रं ते न नो विद्यात्सुयोधनः
nadūre nagaraṃ manye vanādasmādahaṃ prabhośīghraṃ gacchāma bhadraṃ te na no vidyātsuyodhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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