महाभारत 1.145.11मथ्यमानेव दुःखेन हृदयेन पृथा ततःउवाच भीमं कल्याणी कृपान्वितमिदं वचःmathyamāneva duḥkhena hṛdayena pṛthā tataḥuvāca bhīmaṃ kalyāṇī kṛpānvitamidaṃ vacaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें