महाभारत 1.146.8
समर्थः पोषणे चासि सुतयो रक्षणे तथान त्वहं सुतयोः शक्ता तथा रक्षणपोषणे
samarthaḥ poṣaṇe cāsi sutayo rakṣaṇe tathāna tvahaṃ sutayoḥ śaktā tathā rakṣaṇapoṣaṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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