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महाभारत 1.149.19
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवमुक्तस्तु पृथया स विप्रो भार्यया सहहृष्टः संपूजयामास तद्वाक्यममृतोपमम्
evamuktastu pṛthayā sa vipro bhāryayā sahahṛṣṭaḥ saṃpūjayāmāsa tadvākyamamṛtopamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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