महाभारत 1.149.8
न त्वहं वधमाकाङ्क्षे स्वयमेवात्मनः शुभेपरैः कृते वधे पापं न किंचिन्मयि विद्यते
na tvahaṃ vadhamākāṅkṣe svayamevātmanaḥ śubheparaiḥ kṛte vadhe pāpaṃ na kiṃcinmayi vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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