महाभारत 1.150.22
क्षत्रियः क्षत्रियस्यैव कुर्वाणो वधमोक्षणम्विपुलां कीर्तिमाप्नोति लोकेऽस्मिंश्च परत्र च
kṣatriyaḥ kṣatriyasyaiva kurvāṇo vadhamokṣaṇamvipulāṃ kīrtimāpnoti loke'smiṃśca paratra ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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