महाभारत 1.150.7
यस्य बाहू समाश्रित्य सुखं सर्वे स्वपामहेराज्यं चापहृतं क्षुद्रैराजिहीर्षामहे पुनः
yasya bāhū samāśritya sukhaṃ sarve svapāmaherājyaṃ cāpahṛtaṃ kṣudrairājihīrṣāmahe punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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