महाभारत 1.151.7
भीमसेनस्तु तच्छ्रुत्वा प्रहसन्निव भारतराक्षसं तमनादृत्य भुङ्क्त एव पराङ्मुखः
bhīmasenastu tacchrutvā prahasanniva bhāratarākṣasaṃ tamanādṛtya bhuṅkta eva parāṅmukhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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