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महाभारत 1.152.11
ततस्ते विस्मिताः सर्वे कर्म दृष्ट्वातिमानुषम्दैवतान्यर्चयां चक्रुः सर्व एव विशां पते
tataste vismitāḥ sarve karma dṛṣṭvātimānuṣamdaivatānyarcayāṃ cakruḥ sarva eva viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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