महाभारत 1.152.17स तदन्नमुपादाय गतो बकवनं प्रतितेन नूनं भवेदेतत्कर्म लोकहितं कृतम्sa tadannamupādāya gato bakavanaṃ pratitena nūnaṃ bhavedetatkarma lokahitaṃ kṛtamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें