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महाभारत 1.154.11
द्रोण उवाच · droṇa uvāca
अस्त्राणि चैव सर्वाणि तेषां संहारमेव चप्रयोगं चैव सर्वेषां दातुमर्हति मे भवान्
astrāṇi caiva sarvāṇi teṣāṃ saṃhārameva caprayogaṃ caiva sarveṣāṃ dātumarhati me bhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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