महाभारत 1.154.7
स नित्यमाश्रमं गत्वा द्रोणेन सह पार्षतःचिक्रीडाध्ययनं चैव चकार क्षत्रियर्षभः
sa nityamāśramaṃ gatvā droṇena saha pārṣataḥcikrīḍādhyayanaṃ caiva cakāra kṣatriyarṣabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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