महाभारत 1.155.22
स हि ब्रह्मविदां श्रेष्ठो ब्रह्मास्त्रे चाप्यनुत्तमःतस्माद्द्रोणः पराजैषीन्मां वै स सखिविग्रहे
sa hi brahmavidāṃ śreṣṭho brahmāstre cāpyanuttamaḥtasmāddroṇaḥ parājaiṣīnmāṃ vai sa sakhivigrahe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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