महाभारत 1.155.8
तारणे युक्तरूपौ तौ ब्राह्मणावृषिसत्तमौस तावामन्त्रयामास सर्वकामैरतन्द्रितः
tāraṇe yuktarūpau tau brāhmaṇāvṛṣisattamausa tāvāmantrayāmāsa sarvakāmairatandritaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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