महाभारत 1.157.8तपस्तप्तुमथारेभे पत्यर्थमसुखा ततःतोषयामास तपसा सा किलोग्रेण शंकरम्tapastaptumathārebhe patyarthamasukhā tataḥtoṣayāmāsa tapasā sā kilogreṇa śaṃkaramइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें