महाभारत 1.158.48
ततो भागीकृतो देवैर्वज्रभाग उपास्यतेलोके यत्साधनं किंचित्सा वै वज्रतनुः स्मृता
tato bhāgīkṛto devairvajrabhāga upāsyateloke yatsādhanaṃ kiṃcitsā vai vajratanuḥ smṛtā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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