महाभारत 1.16.23
ददाह कुञ्जरांश्चैव सिंहांश्चैव विनिःसृतान्विगतासूनि सर्वाणि सत्त्वानि विविधानि च
dadāha kuñjarāṃścaiva siṃhāṃścaiva viniḥsṛtānvigatāsūni sarvāṇi sattvāni vividhāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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