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महाभारत 1.160.36
न देवीं नासुरीं चैव न यक्षीं न च राक्षसीम्न च भोगवतीं मन्ये न गन्धर्वीं न मानुषीम्
na devīṃ nāsurīṃ caiva na yakṣīṃ na ca rākṣasīmna ca bhogavatīṃ manye na gandharvīṃ na mānuṣīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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