महाभारत 1.161.2तस्मिन्निपतिते भूमावथ सा चारुहासिनीपुनः पीनायतश्रोणी दर्शयामास तं नृपम्tasminnipatite bhūmāvatha sā cāruhāsinīpunaḥ pīnāyataśroṇī darśayāmāsa taṃ nṛpamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें