महाभारत 1.162.2
अमात्यः सानुयात्रस्तु तं ददर्श महावनेक्षितौ निपतितं काले शक्रध्वजमिवोच्छ्रितम्
amātyaḥ sānuyātrastu taṃ dadarśa mahāvanekṣitau nipatitaṃ kāle śakradhvajamivocchritam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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