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महाभारत 1.165.26
गौरुवाचपाषाणदण्डाभिहतां क्रन्दन्तीं मामनाथवत्विश्वामित्रबलैर्घोरैर्भगवन्किमुपेक्षसे
gauruvācapāṣāṇadaṇḍābhihatāṃ krandantīṃ māmanāthavatviśvāmitrabalairghorairbhagavankimupekṣase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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