महाभारत 1.166.24
ततोऽर्धरात्र उत्थाय सूदमानाय्य सत्वरम्उवाच राजा संस्मृत्य ब्राह्मणस्य प्रतिश्रुतम्
tato'rdharātra utthāya sūdamānāyya satvaramuvāca rājā saṃsmṛtya brāhmaṇasya pratiśrutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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