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महाभारत 1.168.3
गन्धर्व उवाच · gandharva uvāca
तमापतन्तं संप्रेक्ष्य वसिष्ठो भगवानृषिःवारयामास तेजस्वी हुंकरेणैव भारत
tamāpatantaṃ saṃprekṣya vasiṣṭho bhagavānṛṣiḥvārayāmāsa tejasvī huṃkareṇaiva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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