महाभारत 1.168.5
स हि द्वादश वर्षाणि वसिष्ठस्यैव तेजसाग्रस्त आसीद्गृहेणेव पर्वकाले दिवाकरः
sa hi dvādaśa varṣāṇi vasiṣṭhasyaiva tejasāgrasta āsīdgṛheṇeva parvakāle divākaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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