महाभारत 1.169.13
तस्मिन्नृपतिशार्दूले स्वर्यातेऽथ कदाचनबभूव तत्कुलेयानां द्रव्यकार्यमुपस्थितम्
tasminnṛpatiśārdūle svaryāte'tha kadācanababhūva tatkuleyānāṃ dravyakāryamupasthitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें