महाभारत 1.172.3
ततो वृद्धांश्च बालांश्च राक्षसान्स महामुनिःददाह वितते यज्ञे शक्तेर्वधमनुस्मरन्
tato vṛddhāṃśca bālāṃśca rākṣasānsa mahāmuniḥdadāha vitate yajñe śaktervadhamanusmaran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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