महाभारत 1.172.9
तथा पुलस्त्यः पुलहः क्रतुश्चैव महाक्रतुम्उपाजग्मुरमित्रघ्न रक्षसां जीवितेप्सया
tathā pulastyaḥ pulahaḥ kratuścaiva mahākratumupājagmuramitraghna rakṣasāṃ jīvitepsayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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