महाभारत 1.173.24
एतस्मात्कारणाद्राजा वसिष्ठं संन्ययोजयत्स्वदारे भरतश्रेष्ठ शापदोषसमन्वितः
etasmātkāraṇādrājā vasiṣṭhaṃ saṃnyayojayatsvadāre bharataśreṣṭha śāpadoṣasamanvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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