महाभारत 1.181.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
अजिनानि विधुन्वन्तः करकांश्च द्विजर्षभाःऊचुस्तं भीर्न कर्तव्या वयं योत्स्यामहे परान्
ajināni vidhunvantaḥ karakāṃśca dvijarṣabhāḥūcustaṃ bhīrna kartavyā vayaṃ yotsyāmahe parān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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