महाभारत 1.187.7
श्रुत्वा ह्यमरसंकाश तव वाक्यमरिंदमध्रुवं विवाहकरणमास्थास्यामि विधानतः
śrutvā hyamarasaṃkāśa tava vākyamariṃdamadhruvaṃ vivāhakaraṇamāsthāsyāmi vidhānataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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