महाभारत 1.192.23
को हि द्रुपदमासाद्य मित्रं क्षत्तः सबान्धवम्न बुभूषेद्भवेनार्थी गतश्रीरपि पार्थिवः
ko hi drupadamāsādya mitraṃ kṣattaḥ sabāndhavamna bubhūṣedbhavenārthī gataśrīrapi pārthivaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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