महाभारत 1.192.8
वृत्ते स्वयंवरे चैव राजानः सर्व एव तेयथागतं विप्रजग्मुर्विदित्वा पाण्डवान्वृतान्
vṛtte svayaṃvare caiva rājānaḥ sarva eva teyathāgataṃ viprajagmurviditvā pāṇḍavānvṛtān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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