महाभारत 1.193.2अतस्तेषां गुणानेव कीर्तयामि विशेषतःनावबुध्येत विदुरो ममाभिप्रायमिङ्गितैःatasteṣāṃ guṇāneva kīrtayāmi viśeṣataḥnāvabudhyeta viduro mamābhiprāyamiṅgitaiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें