महाभारत 1.196.9
एवं सान्त्वसमायुक्तं द्रुपदं पाण्डवैः सहउक्त्वाथानन्तरं ब्रूयात्तेषामागमनं प्रति
evaṃ sāntvasamāyuktaṃ drupadaṃ pāṇḍavaiḥ sahauktvāthānantaraṃ brūyātteṣāmāgamanaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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