महाभारत 1.197.24
द्रुपदोऽपि महान्राजा कृतवैरश्च नः पुरातस्य संग्रहणं राजन्स्वपक्षस्य विवर्धनम्
drupado'pi mahānrājā kṛtavairaśca naḥ purātasya saṃgrahaṇaṃ rājansvapakṣasya vivardhanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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