महाभारत 1.199.37
तत्रागच्छन्द्विजा राजन्सर्ववेदविदां वराःनिवासं रोचयन्ति स्म सर्वभाषाविदस्तथा
tatrāgacchandvijā rājansarvavedavidāṃ varāḥnivāsaṃ rocayanti sma sarvabhāṣāvidastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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