महाभारत 1.201.10
ततो देवाभवन्भीता उग्रं दृष्ट्वा तयोस्तपःतपोविघातार्थमथो देवा विघ्नानि चक्रिरे
tato devābhavanbhītā ugraṃ dṛṣṭvā tayostapaḥtapovighātārthamatho devā vighnāni cakrire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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