महाभारत 1.201.2
महासुरस्यान्ववाये हिरण्यकशिपोः पुरानिकुम्भो नाम दैत्येन्द्रस्तेजस्वी बलवानभूत्
mahāsurasyānvavāye hiraṇyakaśipoḥ purānikumbho nāma daityendrastejasvī balavānabhūt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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