महाभारत 1.202.3
गदापट्टिशधारिण्या शूलमुद्गरहस्तयाप्रस्थितौ सहधर्मिण्या महत्या दैत्यसेनया
gadāpaṭṭiśadhāriṇyā śūlamudgarahastayāprasthitau sahadharmiṇyā mahatyā daityasenayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें