महाभारत 1.202.4
मङ्गलैः स्तुतिभिश्चापि विजयप्रतिसंहितैःचारणैः स्तूयमानौ तु जग्मतुः परया मुदा
maṅgalaiḥ stutibhiścāpi vijayapratisaṃhitaiḥcāraṇaiḥ stūyamānau tu jagmatuḥ parayā mudā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें