महाभारत 1.203.7यथाकृतं यथा चैव कृतं येन क्रमेण चन्यवेदयंस्ततः सर्वमखिलेन पितामहेyathākṛtaṃ yathā caiva kṛtaṃ yena krameṇa canyavedayaṃstataḥ sarvamakhilena pitāmaheइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें