महाभारत 1.205.24
समयः समतिक्रान्तो भवत्संदर्शनान्मयावनवासं गमिष्यामि समयो ह्येष नः कृतः
samayaḥ samatikrānto bhavatsaṃdarśanānmayāvanavāsaṃ gamiṣyāmi samayo hyeṣa naḥ kṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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