महाभारत 1.207.11
स तु तैरभ्यनुज्ञातः कुन्तीपुत्रो धनंजयःसहायैरल्पकैः शूरः प्रययौ येन सागरम्
sa tu tairabhyanujñātaḥ kuntīputro dhanaṃjayaḥsahāyairalpakaiḥ śūraḥ prayayau yena sāgaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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