महाभारत 1.209.5
सर्वभूतेषु धर्मज्ञ मैत्रो ब्राह्मण उच्यतेसत्यो भवतु कल्याण एष वादो मनीषिणाम्
sarvabhūteṣu dharmajña maitro brāhmaṇa ucyatesatyo bhavatu kalyāṇa eṣa vādo manīṣiṇām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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