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महाभारत 1.21.13
त्वं सर्वममृतं देव त्वं सोमः परमार्चितःत्वं मुहूर्तस्तिथिश्च त्वं लवस्त्वं वै पुनः क्षणः
tvaṃ sarvamamṛtaṃ deva tvaṃ somaḥ paramārcitaḥtvaṃ muhūrtastithiśca tvaṃ lavastvaṃ vai punaḥ kṣaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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