महाभारत 1.210.21
कृष्णस्य भवने रम्ये रत्नभोज्यसमावृतेउवास सह कृष्णेन बहुलास्तत्र शर्वरीः
kṛṣṇasya bhavane ramye ratnabhojyasamāvṛteuvāsa saha kṛṣṇena bahulāstatra śarvarīḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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